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40 million people with diabetes will be left without insulin by 2030, study predicts

40 million people with diabetes will be left without insulin by 2030, study predicts (CNN) As the number of people living with diabetes continues to rise, the access to insulin needed to meet growing demand will fall short, a new study predicts. By 2030, 79 million adults with type 2 diabetes are expected to need insulin to manage their condition and if current levels of access remain, only half of them will be able to be able to get an adequate supply, according to a modeling study published Wednesday in the journal  Lancet Diabetes and Endocrinology. Access to the drug must be significantly improved, the researchers warn, particularly in the African, Asian and Oceania regions, which will be most affected. Plants and extreme fitness: How one man added years to his life "These estimates suggest that current levels of insulin access are highly inadequate compared to projected need, particularly in Africa and Asia, and more efforts should be devoted to overco...

NOV 19 Combat climate change by cutting beef and lamb production, report says(Part I, HINDI ) इनबॉक्स x

तमाम तरह के खाद्यों में सबसे ज्यादा खामियाज़ा यदि जलवायु को किसी खाद्य से उठाना  पड़ता है तो वह खाद्य है गौ मांस। यहां हम भगवद्गीता  में वर्णित तीन तरह के  खाद्यों सतो -रजो -तमो गुणों से संसिक्त (सात्विक -राजसिक -तामसिक  )भोजन की नहीं कर रहें हैं।  जलवायु को होने वालो नुकसानी के आधार पर हम अपनी बात अधुनातन शोध के आलोक में कह रहें हैं।  उत्तरी अमरीका में उपभोग्य खाद्यों से ताल्लुक रखने वाली प्राकृत संसाधन प्रतिरक्षा परिषद् (Natural Resources Defense Council On Food Consumption ,NRDC)ने २०१७ में जो अध्ययन संपन्न किया था उसके मुताबिक़ प्रति  किलोग्रेम गौमांस की उपलब्धि के पीछे २६. ५ (साढ़े छब्बीस किलोग्रेम वेट )ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाइआक्साइड हमारी हवा में  में दाखिल हो जाती है।यह उत्सर्जन प्रतिकिलोग्रेम वेट चिकन और टर्की की उपलब्धि पर  उत्सर्जित गैस से पांच गुना ज्यादा है।  खाद्य एवं कृषि संघ (संयुक्त राष्ट्र )के अनुसार भूमंडलीय स्तर पर होने वाले कुल ग्रीनहाउस गैस...

नीच संग प्रसादेन जातं जन्म निरर्थकम बर्बर वास नरक् कर पाता , दुष्ट संग नहिं जनि देइ विधाता। कांग्रेसी चाटुकारों को अपने परलोक की चिंता करनी चाहिए। दुष्टों का संग साथ त्याज्य है इसे समझना चाहिए।

मल्लिकार्जुन खड़गे कहते हैं -" मोदी जी साढ़े चार कदम चले नहीं और हमसे कहते हैं आपने किया क्या ?दोस्तों अगर आपने मोदी जी को वोट दिया तो आप सनातन धर्म और आरएसएस को मजबूत करेंगें। देश पर फिर   सनातन धर्म और आरएसएस ही राज करेंगे " खडगे जी बत्लादें आपको : सनातन धर्म एक वैश्विक धर्म है विश्व धर्म है।वृत्तिक धर्म है, एक वृत्ति का नाम सनातन धर्म है। एक स्वाभाव का नाम सनातन धर्म है। एक नैतिकता एक कर्तव्य कर्म का नाम सनातन धर्म है।हर वस्तु पदार्थ का एक धर्म है जैसे पानी का धर्म शीतलता है वायु का बहाव ,अग्नि का धर्म जलाना ,फूल का सुगंध बिखेरना , काँटों का चुभन। परस्पर विरोधी गुण  हैं  यह. जैसे जल जला नहीं सकता अग्नि शीतलता नहीं दे सकती है। कांटे खुश्बू नहीं दे सकते।फूल चुभन नहीं दे सकते।      मल्लिकार्जुन खड़गे पहले ये बतलायें - जिस नेहरुपंथी अपशिष्ट कांग्रेस की वह वकालत करते हैं उसकी धर्म संबंधी अवधारणा क्या है ?वह बतलाये क्या किसी हिन्दू ने तलवार के बल पर किसी को बाधित किया है अपना धर्म परिवर्तन करने ...

राफेल का पूरा सच खोल डाला मेजर जनरल एस पी सिन्हा ने

Major General Mrinal Suman, AVSM, VSM, PhD, commanded an Engineer Regiment on the Siachen Glacier, the most hostile battlefield in the world. A highly qualified officer (B Tech, MA (Public Administration), MSc (Defence Studies) and a Doctorate in Public Administration) he was also the Task Force Commander at Pokhran and was responsible for designing and sinking shafts for the nuclear tests of May 1998. बे -शक भारतीय प्रतिरक्षा सेवाओं के साथ -साथ भारतीय चुनाव आयोग और माननीय सुप्रीम कोर्ट का भारत को अन्य  राष्ट्रों के बीच एक अग्रणी राष्ट्र बनाये रखने उसकी सम्प्रभुता को अक्षुण रखने में अप्रतिम योगदान रहा आया है।  लेकिन जैसे -जैसे २०१९ नज़दीक आ रहा है उन लोगों की बे -चैनी बढ़ती जा रही है जो वर्तमान राजनीतिक प्रबंध में स्थान नहीं पा सके। इनमें चंद रक्तरँगी तो हैं ही, धंधेबाज़ राजनीतिक विपक्ष के संग -संग सुपर राजनीतिक की भूमिका में माननीय सुप्रीम कोर्ट भी आता दिखलाई दिया है। ऐसा हम नहीं कहते भारत -धर्मी समाज के लोग मुंह खोलकर कहने लगें...